केदारनाथ यात्रा कैसे करे? जाने केदारनाथ मंदिर की यात्रा व ट्रेक के बारे में संपूर्ण जानकारी

केदारनाथ यात्रा कैसे करे? जाने केदारनाथ मंदिर की यात्रा व ट्रेक के बारे में संपूर्ण जानकारी

 

दोस्तों एक बार फिर से स्वागत है। आपका www.helpmeindia.in में, दोस्तों जब भोले बाबा बुलाते हैं तो भक्त भागे दौड़े चले आते हैं और भगवान शिव की सबसे बड़ी लोकप्रिय यात्रा केदारनाथ को पूरा करने के लिए हर कोई उतावला रहता है। लेकिन लोगों के जहन में अक्सर ये सवाल उठता है कि आखिर केदारनाथ की यात्रा में कितना खर्च आता है। हम वहां कैसे जा सकते हैं। यात्रा के लिए कब जाना चाहिए और यात्रा के दौरान कौन सी जगह है जहां हम रुक सकते हैं, कहां घूम सकते हैं। ये सभी कुछ ऐसे सवाल है जो लोगों के मन में अक्सर उठते हैं। पर आप चिंता मत करो क्योंकि आज के इस खास आर्टिकल में मैं यानी आपका दोस्त असगर भाई आपको केदारनाथ यात्रा से जुड़ी एक एक जानकारी देने आया हूं। बस मेरे साथ आर्टिकल में इसी तरह बने रहिए,दोस्तो सबसे पहला सवाल आता है।

केदारनाथ कैसे पहुंचे?

दोस्तो केदारनाथ पहुंचने के लिए अगर हम ट्रेन की बात करें तो आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन, देहरादून रेलवे स्टेशन और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन|

इन तीनों में से किसी एक रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर आगे की यात्रा कर सकते हैं क्योंकि इसके आगे आप ट्रेन से नहीं जा सकते। इसके आगे आपको बस की यात्रा करनी पड़ेगी। केदारनाथ यात्रा के लिए आपको सबसे पहले सोनप्रयाग पहुंचना होगा और इन तीनों रेलवे स्टेशन से आपको सोनप्रयाग ले जाने वाली बस अवेलेबल हो जाएगी। लेकिन अगर आप प्लेन से केदारनाथ आना चाहते हैं तो आप देहरादून एयरपोर्ट पर फ्लाइट से आ सकते है लेकिन फ्लाइट का भी सफर सिर्फ देहरादून एयरपोर्ट तक ही हो पाएगा। उसके बाद आपको सोनप्रयाग के लिए बस पकड़नी पड़ेगी। दोस्तों सबसे अच्छी बात ये है कि हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश तीनों ही जगह से बड़ी आसानी से बस मिलने लगती है। सुबह 5:00 बजे से लेकर रात के 7:00 – 8:00 बजे तक बस अवेलेबल रहती है। बस की टिकट आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से मिल जाएगी। अगर हम बस के किराए की बात करें तो दोस्तों अगर आप स्टेशन के बाहर ऑफलाइन टिकट लेते हैं तो ये प्रति पर्सन ₹350 के आसपास पड़ेगा और अगर आप ऑनलाइन अपने मनपसंद की सीट बुक करते हैं तो इसका खर्चा ₹500 भी आ जाता है। हालांकि कुछ सेमी स्लीपर बसें भी चलती है जिनका किराया ₹700 भी होता है। हालांकि अगर आप अपनी पर्शनल कार या बस लाना चाहते हैं तो उसकी भी कोई टेंशन नहीं है। सोनप्रयाग तक आप आ सकते हैं, लेकिन उसके बाद कोई भी पर्सनल कार या बस आगे नहीं जाती। अब आप जब सोनप्रयाग पहुंचते हैं और अगर आप वहां पहुंचते-पहुंचते रात हो जाती है या फिर आप वहां रुकना चाहते हैं क्योंकि कई घंटों का बस का सफर काफी ज्यादा मुश्किल होता है। इसलिए अगर आप सोनप्रयाग में रुकते हैं तो वहां पर आपको होटल का खर्चा 800 से 1000 रुपए पड़ जाएगा। अगर आप इतना पैसा खर्च नहीं करना चाहते तो आप डॉरमेट्री में रुक सकते हैं। वहां कई सारे डोर मेट्री बने है जिसका चार्ज ₹350 प्रति व्यक्ति की दर से आता है और अगर आपको ये भी ज्यादा लग रहा है। तो यहां पर आपको हॉल भी मिल जाएंगे जहां एक बड़ा सा हॉल होता है जिसमें आपको गद्दे तक्किए और रजाई दे दी जाएगी और ₹100 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से आपको चार्ज किया जाएगा और आपको लॉकर रूम भी दिया, जिसमें आप अपना सामान रखकर उस लॉक करके चाबी अपने पास रख रखते हैं।अब बात करते हैं:-

 

केदारनाथ जाने का सबसे सही समय क्या है?

तो दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं। केदारनाथ के कपाट केवल 6 महीने के लिए खुलते हैं। अप्रैल में ही से लेकर अक्टूबर नवंबर के बीच में कपाट खुलते हैं। ऐसे में यहां जाने का सबसे बेहतर समय सितंबर अक्टूबर होता है क्योंकि इस समय बहुत कम सैलानी आते हैं। आप कम खर्चे में आराम से दर्शन कर सकते हैं क्योंकि अगर आप पिक सीजन में जाएंगे। यानी कि मई जून के महीने में जाएंगे तो गर्मियों की छुट्टियों की वजह से यहां लोगों की भीड़ ज्यादा रहती है। और हर चीज का खर्चा ज्यादा रहता है और जुलाई अगस्त के महीने में बारिश होती है। ऐसे में आप सही से दर्शन नहीं कर पाएंगे। इसलिए अगर आपको अच्छे तरीके से दर्शन करने है तो सितंबर अक्टूबर के महीने सबसे बेस्ट है। अब आपको सोनप्रयाग से गौरीकुंड पहुंचना है जिसके डिस्टेंस 5 किलोमीटर है यहां तक पहुंचने के दो रास्ते है अगर आप सोनप्रयाग से केदारनाथ जी के मंदिर खच्चर से जाना चाहते हैं तो उसका किराया आपको 25 सौ के लगभग पड़ जाएगा। इसके अलावा प्राइवेट टैक्सी भी जाती है। जहां ₹30 प्रति व्यक्ति लेते हैं और आपको 5 किलोमीटर की दूरी तय करवा देते हैं। गौरीकुंड पहुंचने के बाद वहां एक श्री गौरी माता का मंदिर होता है जिसके दर्शन आप कर सकते हैं। हालांकि गौरीकुंड से केदारनाथ की जो डिस्टेंस 16 किलोमीटर की है और ये डिस्टेंस आपको पैदल चलकर पूरी करनी है। इसलिए आपको अपनी यात्रा बिल्कुल सुबह शुरू करनी पड़ेगी। अगर आप गौरीकुंड से खच्चर करके आगे केदारनाथ मंदिर तक जाना चाहते हो तो उसकी भी व्यवस्था है जिसका किराया सौ रुपया पड़ता है। वैसे गौरीकुंड से आप कुछ भी कर सकते हैं, जिसका किराया लगभग 5000 से 6000 होता है लेकिन अगर आप पैदल यात्रा करना चाहते हैं तो आपको लाठी का सहारा लेना पड़ेगा ताकि आप आराम से अपनी यात्रा पूरी कर पाए क्योंकि आगे चढ़ाई बहुत और बिना लाठी के वो मुमकिन भी नहीं।

दोस्तों अगर आप पैदल यात्रा नहीं करना चाहते। आपको कोई दिक्कत परेशानी है तो आप हेलीकॉप्टर यात्रा भी कर सकते हैं। हेलीकॉप्टर यात्रा के लिए आपको सोनू प्रयाग जाने की जरूरत नहीं है बल्कि उससे पहले एक फाटा नाम की जगह पड़ेगी और यहां उतरकर काउंटर बना होता है जहां से आप केदारनाथ से जा सकते हैं। एक व्यक्ति का राउंड ट्रिप का किराया हेलीकॉप्टर से ₹6000 पड़ता है जिसमें हेलीकॉप्टर आपको ले जाता है। दर्शन करवा कर वापस फाटा छोड़ता है। वैसे अगर आप चाहे तो हेलीकॉप्टर की बुकिंग ऑनलाइन भी करवा सकते है क्योंकि पिक सीजन में ऑफलाइन का मौका ही नहीं मिलता। हालांकि कई लोग 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा का भरपूर आनंद उठाते हैं और नजारों को देखते हुए चलते हैं। जिस में समय भले ही लगता हो थकान भी लगती हो, लेकिन इस यात्रा में जो दृश्य देखते हैं, वो सच में अद्भुत होते हैं। पैदल यात्रा के दौरान आपको 2013 में जो आपदा आई थी, उसके भी निशान देखने को मिलेंगे और पैदल यात्रा के दौरान आप बड़े आराम से जगह-जगह पर लगे चाय नाश्ते की स्टाल से कुछ खाते पीते भी जा सकते हैं और टॉयलेट वगैरह भी जगह-जगह पर बनी हुई है और अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो उसके लिए भी मेडिकल कैंप भी थोड़ी थोड़ी दूरी में लगे होते है। यानी कि आपकी केदारनाथ की यात्रा में आपके लिए पूरी व्यवस्था होती है क्योंकि बहुत ही बड़ी और प्रचलित यात्रा लोगों की आस्था और विश्वास इससे जुड़ा हुआ है और जब लोग केदारनाथ मंदिर पहुंचते हैं, तो उनको एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है और वह अनुभूति उनसे कोई छीन ना पाए। इसलिए सारी व्यवस्था की जाती है।

 

 तो दोस्तो ये थी केदारनाथ यात्रा से जुड़ी जानकारियां उम्मीद है आपको ये आर्टिकल पसंद आई होगी। और अपने दोस्तो के साथ शेयर कर दे।  तो दोस्तो आज के लिए इतना ही और अंत तक आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद!

 

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केदारनाथ मंदिर कैसे जाएं?

केदारनाथ मंदिर कब जाना चाहिए?

 

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